
भारत के राष्ट्रपति एक कार्यपालक अध्यक्ष होते हैं जो भारत के प्रथम नागरिक होते हैं। राष्ट्रपति सेना के सर्वोच्च सेनाध्यक्ष होते हैं
भारत में राष्ट्रपति के पास पर्याप्त शक्तियां होती हैं लेकिन लगभग सभी प्रकार की शक्तियां प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद में निहित होती है। राष्ट्रपति का निवास दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में होता है। जिसे रायसीना हिल भी कहा जाता है।

राष्ट्रपति का चुनाव
राष्ट्रपति का चुनाव अनुच्छेद 55 के अनुसार आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के एकल संक्रमणीय मत पद्धति के द्वारा होता है।
राष्ट्रपति चुनाव में संसद के दोनों सदनों (लोकसभा व राज्यसभा) तथा राज्य की विधायिकाओं द्वारा 5 वर्षों के लिए निर्वाचित किया जाता है
निर्वाचन से संबंधित किसी भी विवाद होने पर निर्णय लेने का अधिकार उच्च न्यायालय का होगा।
राष्ट्रपति की योग्यताएं
- भारत का नागरिक होना चाहिए।
- उम्मीदवार की उम्र 35 वर्ष या इससे अधिक होना चाहिए।
- लोकसभा के सदस्य बनने की योग्यता होनी चाहिए।
- सरकार के अधीन कोई लाभ के पद धारण नहीं किया होना चाहिए।
- अपवाद :- वर्तमान राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्य के राज्यपाल या राज्य के मंत्री लाभ के पद पर रहते हुए निर्वाचन में भाग ले सकते है।

राष्ट्रपति का महाभियोग
- अनुच्छेद 61 से संबंधित
- महाभियोग एक विधायिका संबंधित कार्यवाही है जबकि पद से हटाना एक कार्यपालिका संबधित कार्यवाही है।
- संसद के 1/4 सांसदों का समर्थन मिले।
- प्रस्ताव पारित करने से 14 दिन पहले तक नोटिस देना अनिवार्य है।
- प्रस्ताव के समय उपस्थित सदस्यों का 2/3 से अधिक बहुमत प्राप्त होना चाहिए।
- दूसरे सदन में जांच एक समिति के द्वारा करेगी। जिसमें राष्ट्रपति अपना पक्ष स्वयं या वकील के माध्यम से रख सकते है।
- दूसरा सदन भी 2/3 के बहुमत से पारित होगा उसी दिन से राष्ट्रपति अपने पद से हट जाएंगे।

न्यायिक शक्तियां
- अनुच्छेद 72 में।
- क्षमादान :- किसी को भी दोषमुक्त करना मतलब उसके सभी सजा माफ करना।
- लघुकरण :- दंड की प्रकृति कम करना।
- परिहार :- दंड की अवधि कम करना पर प्रकृति वही रहना।
- विराम :- दंड में कमी करना । जैसे – गर्भवती महिला की सजा कम करना।
- प्रविलंबन :- दंड प्रदान करने में देरी करना।
सभी शक्तियां राष्ट्रपति के इच्छा अनुसार होती हैं, शक्तियां कार्यपालिका प्रकृति की होती है। इनका प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह पर होता है। न्यायालय में इसे चुनौतियां दी जा सकती हैं।

वीटो शक्तियां
- विधायिका की किसी भी कार्यवाही को विधि बनने से रोकने के लिए।
- पूर्ण वीटो :- निर्धारित प्रकिया से आए बिल पर राष्ट्रपति की स्वीकृति या अस्वीकृति देना।
- निलम्बनकारी वीटो :- संविधान संशोधन ओर धन विधेयक को छोड़कर किसी भी बिल को पुनः विचार के लिए वापस संसद में भेज सकता है लेकिन अगर उसे राष्ट्रपति के पास दोबारा भेजा जाता है तो उन्हें इसे पारित करना अनिवार्य होगा।
- पॉकेट वीटो :- राष्ट्रपति के पास किसी बिल को स्वीकृति या अस्वीकृति करने की कोई समय सीमा नहीं होती है।

राष्ट्रपति से संबंधित अनुच्छेद
- अनुच्छेद 52 :- राष्ट्रपति भारत के प्रथम नागरिक होंगे।
- अनुच्छेद 53 :- संघ की कार्यपालिका की शक्तियां राष्ट्रपति में निहित होगी।
- अनुच्छेद 54 :- राष्ट्रपति के निर्वाचन मंडल से संबंधित है।
- अनुच्छेद 55 :- राष्ट्रपति के चुनाव के तरीके से संबंधित से है।
- अनुच्छेद 56 :- राष्ट्रपति के कार्यकाल से संबंधित से है।
- अनुच्छेद 57 :- पुनः चुनाव के लिए पात्र होने से संबंधित ।
- अनुच्छेद 58 :- राष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए आवश्यकता योग्यताएं।
- अनुच्छेद 59 :- राष्ट्रपति के पद के लिए शर्ते उल्लेखित है।
- अनुच्छेद 60 :- राष्ट्रपति पद की शपथ के बारे में है।
- अनुच्छेद 61 :- राष्ट्रपति के महाभियोग के बारे में।
- अनुच्छेद 62 :- राष्ट्रपति के पद रिक्त या अनुपस्थिति के बारे में।
- अनुच्छेद 65 :- राष्ट्रपति के पद रिक्त होने पर उपराष्ट्रपति पद पर रहेंगे, ओर उपराष्ट्रपति के ना होने पर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद कार्यवाहक के रूप में ग्रहण करते हैं।
- अनुच्छेद 71 :- राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित सभी विवादों से संबंधित ।
- अनुच्छेद 72 :- राष्ट्रपति के द्वारा क्षमा दान की शक्तियां
- अनुच्छेद 74 :- राष्ट्रपति को सलाह ओर सहायता के लिए मंत्रिपरिषद का गठन
- अनुच्छेद 78 :- राष्ट्रपति को जानकारी देने आदि में प्रधानमंत्री का कर्तव्य।
- अनुच्छेद 86 :- सदनों में अभिभाषण ओर उन्हें संदेश देने का राष्ट्रपति का अधिकार
- अनुच्छेद 87 :- राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण
- अनुच्छेद 123 :- संसद के सत्रावसान में राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की शक्ति।
- अनुच्छेद 143 :- उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्तियां