
महंगाई भत्ता सरकार द्वारा कर्मचारियों ओर पेंशनभोगियो को दिया जाने वाला वह अतिरिक्त वेतन है जो उन्हें महंगाई (मुद्रास्फीति) के कारण बड़े खर्चों की भरपाई के लिए दिया जाता है। महंगाई भत्ता केंद्रीय कर्मचारियों, राज्य कर्मचारियों, सार्वजनिक क्षेत्र के (PSU) कर्मचारियों ओर पेंशनभोगियो को दिया जाता है ।

महंगाई भत्ते की शुरुआत द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुआ है जब इसे “महंगा भोजन भत्ता” कहा जाता था। बाद में इसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index) से जोड़ दिया गया था। महंगाई भत्ते की गणना CPI के आधार पर की जाती है जिसके अंतर्गत आधार वर्ष पहले 2001 था जो बाद में परिवर्तन करके 2016 कर दिया गया था, मतलब अगर CPI बढ़ेगा तो महंगाई भत्ता भी बढ़ेगा। महंगाई भत्ते में ग्रामीण, अर्द्धशहरी और शहरी कर्मचारियों के लिए अलग अलग दर होती है।
महंगाई भत्ते दो प्रकार के होते हैं (1) VAD(Variable Dearness Allowance) – केंद्र ओर राज्य सरकारें वर्ष में दो बार जनवरी ओर जुलाई में DA की समीक्षा करती है । (2) IDA (Industrial Dearness Allowance) – PSU कर्मचारियों के लिए DPE हर तीन महीने में समीक्षा करती है ।

पेंशनरों को भी DA दिया जाता है लेकिन अगर पेंशनभोगी विदेश में नौकरी करता है तो उसे DA प्राप्त नहीं होगा। महंगाई भत्ता (DA) पूरी तरह Taxable होता है मतलब DA राशि पर भी Tax लगता है। वर्तमान DA में 3% की वृद्धि हुई है जबकि 6 महीने पहले 2% महंगाई भत्ता बढ़ाया गया था।